सन् 1947 तक भारत के लगभग हर गाँव में बैलों से तेल निकाला जाता था तथा कच्ची घाणियों कि संख्या आठ लाख से अधिक थी। हम विश्व के कुल तेल आयात का तीस प्रतिशत अमृत जैसा तेल निर्यात करते थे। आज भारत इंडोनेशिया जैसे देश का स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पाम का तेल खाता है-HaryanaTv1
हरियाणा का असली हीरो👇
हरियाणा के करनाल जिले के खानपुर गाँव से पुष्पेंद्र नाम का असली हीरा निकला है। पुष्पेंद्र ने दो साल पहले एक बैल से पारम्परिक विधि से कच्ची घाणी द्वारा तेल निकालना शुरू किया। आज इसके पास तीन घाणी तथा चार बैल हैं तथा भविष्य में यह ऐसी बीस घाणी लगाने पर विचार कर रहा है।
सन् 1947 तक भारत के लगभग हर गाँव में बैलों से तेल निकाला जाता था तथा कच्ची घाणियों कि संख्या आठ लाख से अधिक थी। हम विश्व के कुल तेल आयात का तीस प्रतिशत अमृत जैसा तेल निर्यात करते थे। आज भारत इंडोनेशिया जैसे देश का स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पाम का तेल खाता है।
पुष्पेंद्र का तेल अमेरिका तक के लोग खाते हैं तथा इसके बैलों के गुण गाते हैं।
मैनें इसको शुभकामनाएं देते हुए घोषणा की है कि इसको गोबरपाथल्योजी का प्रशिक्षण निशुल्क दिया जायेगा जिससे यह गौवंश के लिए प्राकृतिक आवास बना सके तथा गौवंश गर्मी व सर्दी में आराम से रह सकें।
आज हर गाँव को पुष्पेंद्रों कि आवश्यकता है। सर्कुलर इकोनॉमी का यह एक शानदार उदाहरण है। आप 9812757699 पर वाट्सएप संदेश द्वारा इनसे संपर्क कर सकते हैं।
पुष्पेंद्र तुम आगे बढ़ो, हम तुम्हारे साथ हैं✊✊✊
अणपढ़ जाट रोहतकी✍️
