दरभंगा राज परिवार की महारानी कामसुंदरी देवी का निधन मिथिला की एक युगद्रष्टा राजमाता का अवसान Haryana Tv1

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दरभंगा राज परिवार की महारानी कामसुंदरी देवी का निधन
मिथिला की एक युगद्रष्टा राजमाता का अवसान
             दरभंगा से एक अत्यंत दुखद और भावुक कर देने वाली खबर सामने आई है।
मिथिला की ऐतिहासिक पहचान रहे दरभंगा राज परिवार की वरिष्ठ सदस्य महारानी कामसुंदरी देवी का सोमवार को निधन हो गया। वे लगभग 96 वर्ष की थीं और कुछ समय से अस्वस्थ चल रही थीं। उन्होंने दरभंगा स्थित राज परिसर के ‘कल्याणी निवास’ में अंतिम सांस ली।

उनके निधन से केवल दरभंगा ही नहीं, बल्कि पूरे मिथिला क्षेत्र और बिहार में शोक की लहर दौड़ गई है। राजपरिवार, सामाजिक संगठनों, शिक्षण संस्थानों और आम नागरिकों ने इसे मिथिला की सांस्कृतिक और सामाजिक क्षति बताया है।
        महारानी कामसुंदरी देवी : एक संक्षिप्त परिचयमहारानी कामसुंदरी देवी, दरभंगा के प्रसिद्ध महाराजा कामेश्वर सिंह की तीसरी एवं अंतिम पत्नी थीं।
उनका विवाह बीसवीं शताब्दी के मध्य काल में हुआ था।
महाराजा कामेश्वर सिंह की पहली दो पत्नियाँ—
महारानी राजलक्ष्मी देवी एवं महारानी कामेश्वरी प्रिया देवी पहले ही स्वर्गवासी हो चुकी थीं। इस प्रकार महारानी कामसुंदरी देवी लंबे समय तक दरभंगा राज परिवार की सबसे वरिष्ठ राजमाता के रूप में प्रतिष्ठित रहीं।

सामाजिक जीवन और परोपकारी कार्य-
             महारानी कामसुंदरी देवी केवल एक राजसी व्यक्तित्व नहीं थीं, बल्कि वे सेवा, करुणा और सामाजिक दायित्व की प्रतीक थीं।
उन्होंने अपने पति महाराजा कामेश्वर सिंह की स्मृति में
“महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन” की स्थापना की।

इस फाउंडेशन के माध्यम से—
शिक्षा के क्षेत्र में सहायता, निर्धनों और जरूरतमंदों के लिए स्वास्थ्य सेवाएँ, सामाजिक एवं सांस्कृतिक संरक्षण, धार्मिक और लोक-परंपराओं को बढ़ावा
जैसे अनेक कार्य वर्षों तक निरंतर किए जाते रहे।
वे प्रचार से दूर रहकर सेवा करने वाली महिला थीं। उनका जीवन सादगी, अनुशासन और मर्यादा का उदाहरण माना जाता है।

दरभंगा महाराज : मिथिला की पहचान
दरभंगा राज परिवार का नाम केवल राजसी वैभव के लिए नहीं, बल्कि शिक्षा, संस्कृति और समाज सेवा के लिए पूरे भारत में जाना जाता है।

महाराजा कामेश्वर सिंह कौन थे?
महाराजा कामेश्वर सिंह दरभंगा राज के अंतिम शासक
संस्कृत, मैथिली और भारतीय संस्कृति के बड़े संरक्षक
काशी हिन्दू विश्वविद्यालय, दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय सहित अनेक संस्थानों के प्रमुख दानदाता
स्वतंत्रता काल में भी शिक्षा और सामाजिक सेवा के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका उन्होंने मिथिला की परंपरा, भाषा और विद्या को राष्ट्रीय पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

मिथिला की राजपरंपरा और सेवा भावना
दरभंगा राज परिवार ने सदैव— सत्ता से अधिक सेवा को महत्व दिया। शिक्षा को सामाजिक उत्थान का माध्यम माना, धार्मिक और सांस्कृतिक संस्थाओं का संरक्षण किया।
महारानी कामसुंदरी देवी इसी परंपरा की अंतिम जीवित कड़ी थीं, जिनका जाना एक युग के अंत के रूप में देखा जा रहा है।

– शिवनाथ यादव
(लेखक, निर्देशक, निर्माता, गीतकार, पत्रकार, ग्राफिक्स एवं वेबसाइट डिजाइनर व प्रकाशक)

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