मरने के बाद भी माफिया हत्यारा अतीक छाया हुआ है क्यों-HaryanaTv1

मरने के बाद भी माफिया हत्यारा अतीक छाया हुआ है!HaryanaTv1

        बंगाल में उसके लिए कैंडल लाइट जुलूस निकल रहे हैं, जेएनयू में मातम मनाया जा रहा है, कांग्रेस नेता इमरान प्रतापगढ़ी अतीक की शान में शायरी कर रहे हैं!HaryanaTv1
    प्रयागराज में अतीक की कब्र पर एक कांग्रेसी नेता तिरंगा चढ़ाता है, कसीदे पढ़ता है और अतीक के लिए भारत रत्न देने की मांग करता है, महाराष्ट्र में उसको शहीद बताते हुए बैनर और पोस्टर लगाए जा रहे हैं!
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विदेशी मीडिया अतीक को एक मशहूर लीडर बताकर अफसोस जता रहा है, भारत में कईं नेता अतीक को जी लगाकर संबोधित कर रहे हैं, कुछ जाने माने नेता गहरे सदमे में डूबे हैं तो कुछ वोटों का गणित बैठा रहे हैं! कर्नाटक चुनाव में अतीक का जिन्न आने वाला है, दिग्विजय और अखिलेश उदास हैं, नीतीश, ममता, महबूबा और तेजस्वी बड़े गुस्से में हैं! कईं नेताओं के दिलों पर बोझ है, आंखों में खौफ है और कइयों के दिल डूब चुके हैं! अफजल गुरु और याकूब मेमन की तरह अतीक को भी शहीद का दर्जा मिलने वाला है!HaryanaTv1

मुख्तार अंसारी और अतीक दो व्यक्ति नहीं उत्तर प्रदेश में खौफ का दूसरा नाम रहे हैं। आज अखबारों में और टीवी मीडिया पर जहालत से भरे उनके कारनामें दिन रात दिखाए जा रहे हैं। यू ट्यूब और सोशल मीडिया पर अतीक की कहानियों की भरमार है। हिंदू मुस्लिम मर्द और औरतें अपने दर्द लेकर खुद मीडिया में आ रहे हैं और उसके मरने के बाद योगी सरकार से न्याय मांगने का साहस जुटा पा रहे हैं। छोटे पर्दे पर आकर डीजीपी रैंक तक के तमाम पूर्व अधिकारी मुलायम सिंह और मायावती के जमाने में आतंक का पर्याय रहे अतीक के किस्से सुना रहे हैं।HaryanaTv1

जिन गरीब हिंदू मुस्लिमों को अतीक ने मारा है, जिनकी जमीनें छीनकर अपनी दस हजार करोड़ की सल्तनत खड़ी की है, उसके मरने के बाद वे सब न्याय की पुकार कर रहे हैं। ऐसे माहौल में उन नेताओं और उन लोगों पर शर्म आती है जो अतीक के मरने पर कोप भवन में बैठे रुदाली कर रहे हैं। मीडिया के माध्यम से काले कारनामों और अतीक के काले कारनामों का भंडा फोड़ हो रहा है। अफसोस होता है उन आत्महंताओं की सोच पर, अतीक की मौत के बाद जिनके आंसू सुखाए नहीं सूख रहे हैं।HaryanaTv1

अच्छी बात है कि नकाबें उतर रही है। अनेक नेता हमाम में नंगे हो गए हैं। उन्हें लगता है कि ऐसा करने से उनके मुस्लिम वोट बढ़ जाएंगे। सभ्य समाज के वोट कितने कट जाएंगे, इसका उन्हें अंदाजा नहीं है। राजनीति का यही चलन है। ऐसे लोगों को पता तब लगता है, जब मतगणना होती है, परिणाम आते हैं। रुदन और मातम में जो नेता डूबे हैं, चुनाव में जनता उन्हें उनकी हैसियत जरूर बताएगी। ऐसा होता आया है। अब फिर होगा। यह समय है जो सबसे हिसाब लेता है, सबका हिसाब करता है।
व्हाट्सएप ग्रुप से प्राप्त संदेश।
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