भय का कारण और निवारण-HaryanaTv1


*विषय - भय का कारण क्या है...HaryanaTv1 ।* 
Bhay Ka Kya Karan Hai HaryanaTv1
 
परम श्रद्धेय स्वामी जी महाराज जी कह रहे हैं कि श्री सेठ जी कहते थे कि भगवान् है, ऐसा दृढ़ विश्वास हो जाए, तो फिर जनाने की जिम्मेवारी भगवान् की हो जाती है । जिसको भगवान् जनाते हैं, वही जानता है और जानने के बाद तुम्हारा ही हो जाता है । तुम्हारी कृपा से ही तुमको जानता है और आपसे एक हो जाता है । तो भगवान् को मान लो । कह हम तो मानते हैं । तो मानते हैं तो अच्छी बात है, जितना मानते हैं उतना तो लाभ तो है ही ।तो भगवान् को दृढ़ता से मान ले । जैसे हम कहीं जाते हैं, साथ में एक लाठी भी होती है तो उसका भी एक सहारा होता है । रात्रि में जाते हैं तो लालटेन हो, तो उसका भी सहारा होता है और आदमी हो तो सहारा होता ही है । भय नहीं होता, कम लगता है । लाठी नहीं, लालटेन नहीं, आदमी नहीं तो भय लगता है और परमात्मा को मान ले तो भय लगेगा ? 
भगवान् को मान लें तो भय लगेगा ? 
लगता है, तो *भगवान्* को मानता नहीं है । प्रहलाद जी को कितनी त्रास दी गई । पहाड़ से गिराया, सांप को छोड़ा, हाथी छोड़ा, होलिका आग में लेकर बैठ गई । बात उल्टी हो गई । होलिका जल गई और प्रहलाद जी बच गए । तो पिता ने पूछा तू जलता क्यों नहीं ? तो प्रह्लाद जी ने कहा मैं राम का नाम लेता हूं । तो भय कहां से आए ? संपूर्ण ताप का नाश भगवान् का नाम है । अग्नि ठंडा पानी हो गई । राम नाम लेता हूं तो विश्वास है पक्का । होलिका के था कि पुरुष को स्पर्श नहीं करें तो आग में स्नान कर सकती है । पर वह पुरुष को गोदी में लेकर गई बैठ गई । प्रहलाद जी भगवान् का चिंतन करता है । मैं भगवान् का हूं, भगवान् मेरे हैं । बच्चा मां का कपड़ा भी ओढ़ लेता है, तो भय किस बात का ? मां है नहीं, तो भी भय नहीं लगता । भगवान् तो साक्षात साथ में तो भय लगे ? तो भय लगता है, उतनी कमी है । अपनी मां है । 
कहां हो ? 
मां की गोदी में हूं ।
 सदा की मां भगवान् ।
 भगवान् -
 *त्वमेव माता च पिता त्वमेव* 
........... 

 लव, कुश थे न । वो इतना निशंक थे । उनके मां सीता जी, तो पिता सीताजी । बाण चलाना सिखाया सीता जी ने सिखाया । ऐसा युद्ध किया महाराज छक्के छुड़ा दिए । शत्रुघ्न, भरत जी का लड़का, हनुमान जी महाराज । सबको मूर्च्छित कर दिया । हनुमान जी को पकड़ लिया । हनुमान जी कहते हैं हजार रावण आ जावे तो कुछ नहीं समझता,  एक रावण तो क्या ? ऐसे हनुमान जी को पकड़ लिया । सीता जी ने कहा जैसे तुम मेरे बेटे हो, ऐसे ये मेरा बेटा है । छोड़ दो । तो सीता जी ही मां है, सीता जी ही बाप है । जो कुछ आधार है, सीता जी है । युद्ध करते थे तो भी मां को ही याद करके युद्ध शुरू किया । मां का ऐसा भरोसा है । मां ही मां है, पिता भी मां ही है, गुरु भी मां ही है । तुलसीदास जी कहते थे जिनकी (सीता जी की) कृपा से निर्मल मति पाऊं । सीता जी ने कहा कि मेरा मन श्री रघुनाथ जी महाराज को छोड़ कर गया हो, यह सच्ची बात हो तो (धरती फट जावे) । राम जी ने भी लव कुश को पूछा कौन हो ? तो कहा कौन हो क्या पूछते हो ? धनुष बाण से बात करो । ऐसे मेरे भगवान् हैं, भगवान् मेरे साथ हैं । निशंक हो जाए । एक बात सुनी है । सूरदास जी महाराज और तुलसीदास जी महाराज कहीं जा रहे थे । तो सामने से एक बिगड़ा हुआ हाथी आया । तो तुलसीदास जी तो सीधे चलते गए, सूरदास जी ने रास्ता बदल लिया । तो किसी ने कहा कि सूरदास जी को डर लगा । तो बात क्या थी कि सूरदास जी को भय नहीं लगा। सूरदास जी की गोद में छोटा लाला है । तो उनका नुकसान नहीं हो जाए, इसलिए वह रास्ता बदल कर गए और तुलसीदास जी के साथ धनुष वाले भगवान् राम थे, डर किस बात का । तो कमी दोनों की भक्ति में नहीं है, भय नहीं है ।  दोनों के भगवान् साथ में हैं । तो भय किस बात का ? भगवान् कृष्ण ने राक्षसों को मार दिया। पूतना आई, बोबा मुख में दिया, तो दूध आया नहीं, तो जोर से खींचा तो प्राण निकलने लगे, तो बोली छोड़ दे । छोड़ दे क्या ? अब नहीं छोडूंगा । मां की गति दी महाराज । ठाकुर जी ने आंख मींच ली । प्राण निकलने लगे तो भूल गई थी, बनावटी सुंदर रूप बना रखा था ।  फिर असली रूप भयंकर राक्षस विराट रूप बन गया । मां यशोदा ने गोबर, गोमूत्र से नहलाया कन्हैया को । कन्हैया के ऊपर से गाय की पूंछ को घुमाया, नजर उतारी । नून राई कर रही है । कन्हैया रक्षा करें (भक्तों की) और मां कन्हैया की रक्षा करें । तो भगवान् को अपने पास में समझें । तो भय किस बात का ? वो साथ में है जिसके तो भय किस बात का लगे ? तो सेठ जी ने कहा कि भगवान् को मान ले तो दर्शन देना भगवान् का काम है । बोलो कैसी मौज की बात है । भगवान् को मान लेना है, और भगवान् है ।

जय सीताराम सीताराम सीताराम जय सीताराम ।
जय सीताराम सीताराम सीताराम जय सीताराम ।।
        *।। जय सियाराम जी।।*
          *।। ॐ नमह शिवाय।।*
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