साथ पीढ़ी तक बैठ कर खायेगा तब भी नहीं समाप्त होगा आपका धन...बेस्ट मोटिवेशनल स्टोरी-HaryanaTv1
अपने धन के भंडार का निरीक्षण करने के लिए जब जगदीश बाबू रवाना हो जाते हैं धन के भंडार को देखकर उनकी आत्मा तृप्त होनी प्रारंभ हो जाती है,।
अचानक मन में भावना जागृत होती है एक बार अंकक्षण को बुलाकर पूरे धन का सही तरह से पता लगा लेना चाहिए मेरे पास में कितनी धन संपत्ति है,।
तत्काल उसने प्रसिद्ध अंकेक्षण को फोन किया और कहा मेरे घर पर आकर 7 दिनों के अंदर मेरे पूरे संपत्ति का सही मूल्यांकन करके बताना है मेरे पास में कितनी संपत्ति है,।
अंकेक्षण पहुंच जाता है संपत्ति का ब्यौरा इकट्ठा करने के लिए 7 दिनों के पश्चात अपने रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए तैयार हो जाता है,।
अंकेक्षण ने यह निवेदन किया मैं यह स्पष्ट रूप से कह सकता हूं आपके साथ पीढ़ियां बैठी बैठी खाए तो भी आपकी संपत्ति है वह कभी भी खत्म नहीं हो सकती है,
अंकेक्षण अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करके अपने घर की तरफ रवाना हो जाता है सेठ चिंता ग्रस्त रहना प्रारंभ कर देता है,
खाना-पीना नहाना धोना घूमना फिरना सारा बंद हो जाता है केवल चिंता ही चिंता में सेठ़ का शरीर है सुख कर कांटा बन जाता है,
सेठानी लक्ष्मी ने अनेकों बार पूछने का प्रयास किया पर वह हर बार बात को टाल देता है बताने का प्रयास ही नहीं करता है,।
एक बार गांव में संतों का आगमन होता है सत्संग का कार्य प्रारंभ हो जाता है सेठानी लक्ष्मी ने सेठ को निवेदन किया अपने को भी सत संगत में जाना चाहिए जिससे हमारे मन को शांति मिले,।
सेठानी की बात मानकर सेठ़ सतसंगत में जाने के लिए अपने आपको तैयार करना प्रारंभ कर देता है,।
संत रमता राम का सत्संग सेठ के मन को प्रभावित करने वाला बन जाता है सत्संग पूरा होने के पश्चात सेठ अपने आंखों में आंसुओं की धारा बहाता हुआ अपने मन की बात को प्रस्तुत करता है,।
मेरी जीवन रूपी नौका को आप ही पार लगा सकते हैं अब मैं क्या करूं मेरे समझ में नहीं आ रहा है मेरे पास में सात पीढ़ियां जीतना धन है आठवीं पीढ़ी भूखी मर जाएगी यह मेरे को चिंता सता रही है,।
संत समझ गए तत्काल समाधान करते हुए कहा गांव के बाहर एक 100 बरस की बुढ़िया बैठी हुई है जिसके पास में कमाने वाला कोई नहीं है वह स्वयं भी कमाई नहीं कर सकती है आधा किलो आटा उसको प्रतिदिन चाहिए यदि तुम आधा किलो आटा उस बुढ़िया को दे दो तो तुम्हारी चिंता है वह सारी समाप्त हो जाएगी,।
सेठ तत्काल 1 क्विंटल आटा लेकर बुढ़िया के दरवाजे पर पहुंच जाता है निवेदन करता है बुढ़िया मां 1 क्विंटल आटा लाया हूं यह रख ले और मेरा कल्याण कर दे,।
बुढ़िया मां ने कहा बेटा मेरे को आटे की जरूरत नहीं है इसलिए मेरे को आटा नहीं चाहिए,
सेठ ने फिर गिड़गिड़ाते हुए कहा बुढ़िया मां 1 क्विंटल नहीं तो आधा क्विंटल तो रख ले,
बुढ़िया ने फिर हंसते हुए कहा बेटा मैंने कह दिया ना मेरे को आटे की जरूरत नहीं है,
सेठ ने फिर झुकते हुए कहा बुढ़िया मां कम से कम 1 किलो आटा तो रख ही ले,
बुढ़िया ने का बेटा मैंने कह दिया ना मेरे को आटे की जरूरत नहीं है जरूरत नहीं है जरूरत नहीं है,
सेठ ने कहा बुढ़िया मां चल आधा किलो आटा तो आज के लिए रखी ही ले,
बेटा आज मेरे पास में आधा किलो आटा आ गया है इसलिए मेरे को आज आटे की जरूरत नहीं है बुढ़िया ने फिर नकारते हुए कहा,
सेठ ने फिर कहा बुढ़िया मां आज तेरे पास में आटा आ गया है तो कल के लिए आटा रख ले कम से कम मेरा कल्याण तो हो जाएगा,
बुढ़िया ने हंसते हुए कहा बेटा कल की चिंता कौन करे आज स्वास आया है कल क्या पता आए या नहीं आए आज पैर उठा है कल क्या पता फिर उठे या नहीं उठे इसलिए मैं कल की चिंता नहीं करती हूं,
बुढ़िया की बात सुनकर सेठ की आंखें खुल जाती है जो बुढ़िया कल की चिंता नहीं करती आज आराम से रह रही है मैं 7 पीढ़ियों की चिंता कर रहा हूं क्या मेरे समान इस संसार में और कोई मूर्ख आदमी होगा क्या,
चिंता एकदम चिंतन में बदल जाती है सारा टेंशन है वह काफूर हो जाता है सेठ मुस्कुराता हुआ अपने घर की तरफ रवाना हो जाता है सत्संग का महान सुख उसको अपने आप ही प्राप्त हो जाता है।