मित्र कैसा होना चाहिये...HaryanaTv1

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Mitra kaisa hona chahie HaryanaTv1
                       साधना पथ के सच्चे मित्र...

मित्रता ऐसी होनी चाहिए जो 1 दिन के लिए नहीं जिंदगी भर के लिए काम आए हर कार्य को अंजाम देने के लिए कोई न कोई मित्र की आवश्यकता अवश्य ही पड़ती है आज हम सभी पाठकों को दो मित्रों की मित्रता का इतिहास बताने का प्रयास कर रहे हैं एक मित्र जिसका नाम था भोमराज बोथरा दूसरा मित्र जिसका नाम था अशोक गोलछा दोनों ही नागौर जिले के अंतिम छोर पर बसे हुए लाडनू कस्बे में जन्म लेते हैं पहली पट्टी और दूसरी पट्टी में दोनों ही साथ में स्कूल जाते हैं एक ही स्कूल में पढ़ते हैं साथ में खेलते हैं उड़ते हैं देखते हैं अध्यात्म के रंग के अंदर अपने आप को रंगना प्रारंभ कर देते हैं दोनों के मन में एक साथ भी वैराग्य भाव जागृत होता है एक साथ में आचार्य तुलसी के श्री चरणों में पहुंचते हैं दीक्षा प्रदान करने के लिए निवेदन प्रस्तुत करते हैं मित्र अशोक कुमार को दीक्षा का आदेश प्रदान तो हो जाता है पर भोमराज है उसके परिवार वाले दीक्षा प्रदान करने के लिए तैयार नहीं होते हैं पर अपने मित्र को आगे बढ़ते हुए देखकर वह भी अपने आप को रोक नहीं पाता है भरी सभा में खड़ा होकर दीक्षा के लिए निवेदन प्रस्तुत करना प्रारंभ कर देता है आखिर में परिवार वालों को भी सहमत होना पड़ता है और उसको भी दीक्षा का आदेश प्रदान हो जाता है एक साथ में एक ही दिन एक ही समय में आचार्य तुलसी दोनों मित्रों को दीक्षा प्रदान करते हैं दोनों का नामकरण रखा जाता है भोमराज का मुनि भूपेंद्र कुमार अशोक कुमार का मुनि अरविंद कुमार दोनों साथ में दीक्षित होने के पश्चात दोनों ही आचार्य तुलसी के पास में अध्ययन करना प्रारंभ कर देते हैं दोनों को ही आचार्य तुलसी ने प्रेरणा प्रदान की थी स्वयं के पुरुषार्थ के द्वारा आगे बढ़ना है एकांत साधना की ओर विशेष रूप से तुम्हारे को गति और प्रगति करना है गुरु के मुखारविंद से निकले हुए शब्द है वह कभी भी खाली नहीं जाते हैं परिस्थितियां अपने आप ही उनको अनुकूल वातावरण प्रदान करवाना प्रारंभ कर देती है संघर्ष चलता जब सामने आती है तब अंतर का सोया हुआ पुरुषार्थ है वह जब भी तोड़ना प्रारंभ हो जाता है मुनि अरविंद कुमार के साथ जब निर्दयता पूर्वक व्यवहार होना प्रारंभ हो जाता है जहां व्यक्ति को बीमार अवस्था में चिकित्सा की आवश्यकता रहती है उस समय यदि चिकित्सा नहीं मिलती है चिकित्सा की जगह जीवन को धिक्कार मिलना प्रारंभ हो जाता है तो वह अपना रास्ता स्वयं ही बनाना प्रारंभ कर देते हैं मुनि अरविंद कुमार जी ने साधना के क्षेत्र में आगे बढ़ने का संकल्प रिजेक्ट करके अपने कदमों को आगे बढ़ाना प्रारंभ कर दिया जब एक मित्र साधना के पथ पर आगे बढ़ जाता है तब भला दूसरा मित्र है वह साधना के पथ पर आगे कैसे नहीं बढ़ेगा अनेकों बरसों तक आत्म चिंतन करने के पश्चात 2022 27 तारीख को मुनि भूपेंद्र कुमार जी भी अंतर प्रेरणा से प्रेरित होकर साधना के क्षेत्र में अपने कदमों को गतिशील बनाना प्रारंभ कर देते हैं आज दोनों ही मित्र अपनी साधना से परम संतुष्टि का अनुभव कर रहे हैं दोनों ने अपने अपने नए विधायें धारण करना प्रारंभ कर दी अरविंद कुमार योग के माध्यम से मैनेजमेंट विषय पर सेना आदि अनेकों महत्वपूर्ण स्थानों पर अपना 1 घंटे का कार्यक्रम प्रस्तुत करना प्रारंभ किया जिससे प्रभावित होकर उनको सब जगह सम्मान मिलना प्रारंभ हो जाता है जैन धर्म के बड़े आचार्यों संतो ने मिलकर उनको आचार्य पद पर प्रतिष्ठित कर दिया फिर भी वह अपने आप को आचार्य नहीं साधारण साधक ही महान कर अपनी साधना के साथ में जन कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर रही हैं मुनि भूपेंद्र कुमार जी अंतर प्रेरणा से प्रेरित होकर वीतराग भगवान दादा गुरु जिंदत्त सूरी बोथरा कुए के प्रनेता पूनरासर बालाजी तेरापंथ धर्म संघ के चतुर्थ आचार्य जयाचार्य आचार्य भिक्षु और आचार्य तुलसी को अपना आदर्श मानकर साधना के पथ पर अपने कदमों को आगे बढ़ाना प्रारंभ कर दिया पूनरासर बालाजी बोथरा कुल के प्रणेता थे मेवाड़ के देलवाड़ा नरेश थे उनको मेवाड़ में प्रतिष्ठित करने के लिए श्री गोतरा बालाजी धाम मेवाड़ नाम से ट्रस्ट मंडल का गठन करके बालाजी को स्थापित करने का संकल्प अपने मन में कर चुके हैं उनको आचार्य पद पर प्रतिष्ठित कर दिया गया उनका परम भगत सुशील गणेश अग्रवाल ओडिशा कांटा भाजी ने अपने गुरु के सपने को साकार करने के लिए अपनी ही मील में आदि जगह प्रदान करके बावन गजा बालाजी धाम का निर्माण कार्य प्रारंभ कर दिया 1 वर्ष में पूरा मंदिर है खड़ा कर दिया लोगों का भक्तों का सहयोग है वह भी अपने आप मिलना प्रारंभ हो जाता है अब यह मंदिर लगभग बनकर तैयार है आचार्य भूपेंद्र कुमार जी जयपुर से 24 भुजा धारी पार्श्वनाथ पद्मावती शक्तिपीठ बरडिया बालाजी धाम तुलसी महाप्रज्ञ बाटी का द्वारकेश कॉलोनी नोखा के प्रणेता पीठाधीश्वर अशोक मुनि के साथ प्रातः काल 5:15 बजे राजस्थान की राजधानी जयपुर शहर से रवाना होकर 1:30 बजे छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर पहुंचेंगे 1 मई को वहां से कांटा भाजी पहुंच जाएंगे जहां पर 3 तारीख को बावन गजा बालाजी धाम में गादी प्रतिष्ठान समारोह का आयोजन रखा गया है जहां पर आपका साधना का मुख्यालय स्थापित हो जाएगा उसके पश्चात दीपावली के आसपास में अच्छा समय मुहूर्त देखकर बावन गजा बालाजी धाम मूर्ति का प्रतिष्ठा समारोह 3 दिनों के लिए भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा जिसमें मित्र बने अरविंद कुमार के साथ अनेकों अनेकों बड़े-बड़े संत महात्मा विद्वान लोगों की उपस्थिति भी रहेगी दोनों ही मित्र आज साधना को ही अपने जीवन का आधार बनाकर स्वयं कल्याण के साथ पर कल्याण के मार्ग को प्रशस्त करने के लिए अपनी शक्ति का नियोजन करना प्रारंभ कर दिया है जब यह दोनों संत महात्मा एक साथ के अंदर कहीं जाती हैं तब लोग आश्चर्यचकित रह जाते हैं जब जयपुर शहर सेना के खेत के अंदर अपना अच्छा स्वाद दीक्षा दिवस समारोह एक साथ के अंदर वहां पर मनाते हैं सेना के बड़े-बड़े कमांडर पदाधिकारी लोग आश्चर्यचकित रह जाती है क्या ऐसा भी कोई अपना दीक्षा समारोह का आयोजन बनाने वाली मित्र संत मारी को मिल सकती है क्या जब इतिहास बनना प्रारंभ होता है तब अपने आप ही सुनहले क्षण है सामने आने प्रारंभ हो जाते हैं भविष्य में भी दोनों मित्र और भी अपने जीवन के अंदर नए इतिहास का सीजन करेंगे ऐसा हमारे सभी भक्तों को विश्वास है भक्तों की भावना है वह कभी भी खाली नहीं जाती है एक बार सभी भक्तगण दोनों मित्र संतों के प्रति मंगल कामना अभिव्यक्त कर रहे हैं दोनों ही मित्र संघ आचार्य तुलसी के सपनों को साकार कर के अपने जीवन को साधना में बनाकर सार्थकता प्रदान करेंगे इसी मंगल भाव के साथ सभी भक्तगण,
व्हाट्सएप से प्राप्त संदेश।
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