यज्ञशाला गुरुकुल के ब्रह्मचारियों को शास्त्रोक्त विधि से कराया गया 'यज्ञोपवीत संस्कार'...HaryanaTv1
हरियाणा के कुरूक्षेत्र जिले के अंतर्गत इंद्री रोड-लाडवा, बरौंदी-बड़ौंदा में न्यायमूर्ति प्रीतम पाल एवं श्रीमती माया प्रीतम द्वारा स्थापित आर्ष गुरुकुल विद्यापीठ में आज गुरुकुल के ब्रह्मचारियों को सोलह संस्कारों में से एक 'यज्ञोपवीत संस्कार' कराया गया। जस्टिस प्रीतम पाल जी ने गुरुकुल के ब्रह्मचारियों को जीवन में आगे बढ़ने और अपने लक्ष्य को प्राप्त करने के कई टिप्स बताए, इसके साथ ही जब गुरुकुल के प्रबंधक और प्रवक्ता शिवनाथ यादव से बात की गई तो उन्होंने बताया हम देखते हैं कि जीवन का पहला कदम शिक्षा की शुरुआत है। आज के समय में हम इसकी तुलना स्कूल जाने की शुरुआत से कर सकते हैं. जिस प्रकार आज हम शिक्षा प्राप्त करने के लिए विद्यालय में प्रवेश की प्रक्रिया पूर्ण करते हैं, उसी प्रकार गुरुकुल में प्रवेश से पूर्व यज्ञोपवीत संस्कार किया जाता था। इसका उद्देश्य विद्यार्थी जीवन में व्यक्ति को नियमों का पालन कराना तथा दृढ़ निश्चयी बनाना होता है। इसी बात को आगे बढ़ाते हुए गुरुकुल के आचार्य प्रभात शास्त्री जी ने बताया कि सनातन धर्म के 16 संस्कारो में से एक उपनयन संस्कार के अंतर्गत जनेऊ पहनी जाती है जिसे शास्त्र में 'यज्ञोपवीत संस्कार कहते है। यह केवल एक धागा नहीं है बल्कि इसके साथ विशेष मान्यताएं भी जुड़ी हैं। सनातन संस्कृति में, जन्म ले लेकर मृत्यु तक एक व्यवस्थित प्रक्रिया के अंतर्गत एक व्यक्ति का जीवन व्यतीत होता हो जन्म से लेकर मृत्यु पर्यन्त 16 संस्कारों का विधान महर्षि दयानन्द जी ने संस्कार विधि में किया है। इसी के अंतर्गत 10वाँ संस्कार यज्ञोपवीत (उपनयन संस्कार) है। यज्ञोपवीत या उपनयन संस्कार का अर्थ होता है पास या सन्निकट ले जाना अर्थात ब्रह्म या ज्ञान के पास ने जाना। ज्ञान आदि की शुरुआत करने हो पहले ही उपनयन संस्कार की प्रक्रिया होती है इस यज्ञोपवीत में तीन धागा होता है। जो निरन्तर जीवन में अपने कर्तव्यों का संकेत देता रहता है:-(1) देवऋण(2) पितृऋण और (2)ऋषिऋण
आगे उन्होंने बताया कि शरीर में कुल 365 ऊर्जा बिंदु होते हैं। अलग-अलग बिंदु अलग-अलग बीमारियों को प्रभावित करते हैं। कुछ बिंदु सामान्य भी हैं. एक्यूप्रेशर में प्रत्येक बिंदु को दो से तीन मिनट तक दबाना होता है। और हम जनेऊ के साथ भी यही करते हैं, हम उस बिंदु को एक्यूप्रेस करते हैं। उन्होंने कहा
कान के निचले हिस्से (ईयर लोब) पर रोजाना पांच मिनट तक मालिश करने से याददाश्त बढ़ती है। यह टिप पढ़ने वाले बच्चों के लिए बहुत उपयोगी है। अगर आप भूख कम करना चाहते हैं तो खाने से आधा घंटा पहले अपनी उंगली से कान के बाहर वाले छोटे हिस्से (ट्राइगस) को दो मिनट तक दबाएं। भूख कम लगेगी. यहीं प्यास का बिंदु भी है. निर्जला व्रत के दौरान अगर लोग इसे दबाएंगे तो उन्हें प्यास कम लगेगी। इस तरह उन्होंने बहुत सारी जानकारी दी. इस मौके पर मौजूद गुरुकुल परिवार के अलावा प्रचारक चंद्रपाल मुनि और शिक्षक रजत गोयल के अलावा अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।
